अखिल भारतीय,
जैन पत्र संपादक संघ
विकास यात्रा एवं उपलब्धियां।
संगठन का गठन
मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। जैन पत्र पत्रिकाएं समाज व धर्म की प्रहरी हैं। संगठन में अपार शक्ति होती है। इस शक्ति को पहचानते हुए 2 अक्टूबर 2006 को विजयादशमी के पावन पर्व पर मानवीय मूल्यों की स्थापना का विश्वास व जैनत्व के संस्कारों की कीर्ति ध्वजा फहराने की लालसा लेकर मीडिया के प्रभावी युग में जैन पत्रकारिता को नई दिशा प्रदान करने के पावन उद्देश्य से इस अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ का गठन किया गया है।
"मैं अकेला ही चला था जानिवे मंजिल मगर
लोग आते गए और कारवां बनता गया"
मेरे द्वारा उठाए गये इस निर्णायक कदम का साथ देने राजस्थान में वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलापचंद की डांडिया ने हाथ बढाया और हम दोनों मिलकर एक और एक दो नहीं अपितु ग्यारह की शक्ति से मिशन को पूरा करने जुट गये। हमारे मिशन को वरद हस्त व आशीर्वाद मिला राष्ट्रसंत श्वेतपिच्छाचार्य मुनि श्री विद्यानंद जी का। समाज के वरिष्ठ पत्रकार मेरे आव्हान पर 1 मार्च 2007 को समन्वय वाणी जिनागम शोध संस्थान जयपुर के वैनर तले श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी में प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन के निमित्त से एकत्र हुए।
आचार्य श्री चैत्यसागर जी व उपाध्याय श्री उर्जयंत सागर जी के पावन सान्निध्य में सम्पन्न इस सम्मेलन में देश भर से 31 संपादक व पत्रकार सम्मिलित हुए जिसमें प्रमुख थे सर्व श्री मिलापचंद डण्डिया, प्रवीणचंद जी छावडा, डा. भागचंद जी भागेन्दु, पं. रतनचंद भारिल्ल, डा. चिरंजीलाल बगडा, श्री अनूपचंद एडवोकेट, डा. रमेशचंद जी निवाई, डा. संजीव भानावत, श्री रमेश कासलीवाल तथा शुद्धात्म प्रकाश भारिल्ल आदि।
उद्देश्य
भारत की सभी भाषाओं की जैन पत्र- पत्रिकाओं के संपादकों को संगठित कर उनके सर्वांगीण विकास के लिए प्रयत्न करना।
स्वस्थ और रचनात्मक पत्रकारिता के विकास हेतु आवश्यक संसाधन एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराना और नैतिक, धार्मिक मूल्यों के संवर्धन हेतु सत्साहित्य का प्रकाशन करना।
जैन दर्शन,अध्यात्म,( वीतरागता), तत्वज्ञान, सिद्धांत, साहित्य, संस्कृति, इतिहास व कला आदि का मीडिया के प्रभावी साधनों द्वारा सर्वाधिक प्रचार- प्रसार और संरक्षण करना।
जैन पत्र संपादकों,पत्रकारों व विद्वानों के लिए सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, चिकित्सकीय, कानूनी एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कर उनके हितों को संरक्षित करना तथा ससम्मान जीवन यापन हेतु स्थिति निर्मित करना।
जैन पत्र संपादकों के शिक्षण- प्रशिक्षण की व्यवस्था करना व सार्वजनिक उपयोग हेतु शोध पुस्तकालयों तथा शोध संस्थानों की स्थापना करना।
स्वस्थ पत्रकारिता के माध्यम से जैन समाज के सभी पंथों, संप्रदायों एवं उपजातियां में सुसंवाद, अवरोध भाव एवं भावात्मक एकता का वातावरण निर्मित करना एवं जैन आगम के मूल सिद्धांतों का निर्विवाद एवं समन्वित रूप से प्रचार- प्रसार करना तथा आगम विरुद्ध पक्षपाती एवं विघटन वादी प्रवृत्तियों को हतोत्साहित करना।
जैन पत्र- पत्रिकाओं के वैचारिक संबल हेतु जैन न्यू सर्विस की स्थापना करना व उसके माध्यम से संबंधित पत्र- पत्रिकाओं व जैन संचार माध्यमों को समाचार व लेखादि प्रेषित करना।
न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु जमीन- जायदाद खरीदना, अनुदान लेना तथा आवश्यक्तानुसार धनराशि एकत्र करना।
केन्द्र व राज्य सरकारों से जैन पत्र संपादकों के हितों के लिए संरक्षण प्राप्त करना और अन्य पत्रकारों की तरह उन्हें सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने हेतु प्रयत्नशील रहना।
जैन पत्र संपादकों, लिखकों,ख्याति प्राप्त विद्वानों व पत्रकारों को पुरस्कृत व सम्मानित करना।
कानून प्रदत्त अधिकारों, सुविधाओं की प्राप्ति हेतु जैन समाज का मार्गदर्शन करना साथ ही जन सामान्य के सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों की स्थापना हेतु जन जागरण के कार्य कर जीवन का उन्नयन करना।
हमारी प्रवृत्तियां
सदस्यता एवं संगठन
सदस्यता
1100/-संगठन की सदस्यता शुल्क के लिए आजीवन सदस्यता शुल्क निर्धारित है। सदस्यता हेतु संपादक/पत्रकार/ विद्वान/कलमकार को संगठन द्वारा निर्धारित फार्म भरकर देना होगा। न्यास द्वारा स्वीकृति के उपरांत ही वह संगठन का सदस्य मान्य होगा।
परम संरक्षक
31000/-जो व्यक्ति या संस्था संगठन के लिए उपर्युक्त धनराशि प्रदान करेंगे वे व्यक्ति अथवा संस्थाएं संगठन में परम संरक्षक होंगे।
संरक्षक
11000/-जो व्यक्ति अथवा संस्थाएं संगठन के लिए उपर्युक्त धनराशि प्रदान करेंगे संगठन में संरक्षक होंगे।
एक्जीक्यूटिव बोर्ड
5100/-एक्जीक्यूटिव बोर्ड में वही आजीवन सदस्य होंगे जो संगठन हेतु उपर्युक्त राशि प्रदान करेंगे। संगठन द्वारा आयोजित संगोष्ठियों में एक्जीक्यूटिव सदस्य ही भाग लेने के अधिकारी होंगे।
संचालक मण्डल
न्यास को पंजीकृत कराने वाले संस्थापक सदस्य संचालक मण्डल के स्थायी सदस्य होंगे। संचालक मण्डल में न्यासियों की अधिक से अधिक संख्या 15 होगी जिनका चयन स्थायी सदस्य करेंगे। स्थायी न्यासियों को छोडकर शेष न्यासियों की कुल संख्या में से एक तिहाई प्रत्येक तीन वर्ष में सेवा निवृत होंगे। न्यासियों के स्थान की पूर्ति स्थायी न्यासियों की सर्व सम्मति से होगी। सेवा निवृत न्यासी पुनः एक कार्यकाल के लिए मनोनयन के पात्र होंगे。
राष्ट्रीय कार्यकारिणी
संगठन को सुचारू रूप से चलाने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारिणी होगी। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में संचालक मण्डल के सदस्य पदेन होंगे। इन संचालक मण्डल के सदस्यों के अतिरिक्त राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 51 सदस्य होंगे। राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चयन संचालक मण्डल द्वारा निर्धारित विधि से होगा。
राष्ट्रीय अधिवेशन
सन् 2006 से 2018 तक की रिपोर्टप्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन
अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ का प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन 25 अप्रैल 2008 को बाहुबली एन्क्लेव दिल्ली में राष्ट्र संत आचार्य श्री विद्यानंद जी ससंघ के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जैन बोधक की संपादिका पद्म श्री सरयू दफ्तरी ने की। इस अधिवेशन में सर्वसम्मति से वीर के संपादक श्री रविन्द्र मालव-ग्वालियर को संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का अध्यक्ष व समन्वय वाणी के संपादक श्री अखिल बंसल- जयपुर को महामंत्री चुना गया...
द्वितीय राष्ट्रीय अधिवेशन
संगठन का द्वितीय राष्ट्रीय अधिवेशन उ. प्र. की धर्मनगरी हस्तिनापुर में 25 अप्रैल 2009 को आचार्य धर्म भूषण जी की उपस्थिति में आचार्य कल्प भारतभूषण जी के सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। आपने वर्तमान समय में पत्रकारों की महती भूमिका की चर्चा करते हुए उन्हें समाज हित में कार्य करने की प्रेरणा दी।...
तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन
तीर्थराज सम्मेद शिखर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ससंघ के पावन सानिध्य में 14 से 16 जुलाई 2011 तक संगठन का तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न हुआ। इस अधिवेशन की अध्यक्षता जैन गजट के संपादक प्रसिद्ध विद्वान प्राचार्य नरेन्द्रप्रकाश जैन- फिरोजाबाद ने की।
चतुर्थ राष्ट्रीय अधिवेशन
गुजरात की प्रसिद्ध औद्योगिक नगरी सूरत में संगठन का चतुर्थ राष्ट्रीय अधिवेशन 22-23 नवम्बर 2014 को आचार्य श्री सुनील सागर जी के ससंघ सान्निध्य में संपन्न हुआ। डा. चिरंजीलाल बगडा की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का चुनाव सम्पन्न हुआ।
पंचम राष्ट्रीय अधिवेशन
संगठन का पांचवां राष्ट्रीय अधिवेशन उ. प्र. के तीर्थ झांसी स्थित करगुवां जी में कार्याध्यक्ष श्री अखिल बंसल की अध्यक्षता में 26 जनवरी 2018 को सम्पन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री प्रदीप आदित्य थे। 1 अप्रैल 2018 को गणिनी आर्यिका श्री वर्धस्वनंदिनी ससंघ के सान्निध्य में नवीन कार्यकारिणी का शपथग्रहण समारोह संपन्न हुआ।
छठवां राष्ट्रीय अधिवेशन एवं तीर्थयात्रा
दि. 2 से 4 अक्टूबर 2021 तक संगठन का 16वां स्थापना दिवस आगरा,करहल, इटावा, फिरोजाबाद, सौरीपुर बटेश्वर व अन्य समीपस्थ तीर्थक्षेत्रों की वंदना की गई। 3 अक्टूबर को आचार्य श्री प्रमुख सागर जी ससंघ के पावन सान्निध्य में 6 वां राष्ट्रीय अधिवेशन सम्पन्न हुआ।
सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन
तीर्थराज सम्मेद शिखर में 11 से 15 अक्टूबर 2022 तक विभिन्न आयोजनों के साथ आचार्य श्री प्रमुख सागर जी ससंघ के पावन सान्निध्य में सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन सानंद संपन्न हुआ।
आठवां राष्ट्रीय अधिवेशन
अ. भा. जैन पत्र संपादक संघ का आठवां पांच दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन असम की राजधानी गुवाहाटी में आचार्य श्री प्रमुख सागर जी के पावन ससंघ सान्निध्य में 10 से 14 अक्टूबर 2023 तक संपन्न हुआ। जैन तीर्थ दशा और दिशा विषय पर संगोष्ठी संपन्न हुई।
नवम् राष्ट्रीय अधिवेशन
अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ का नवम राष्ट्रीय अधिवेशन नागालैंड की राजधानी दीमापुर में दिनांक 13 से 17 अक्टूबर 2024 तक आचार्य श्री प्रमुख सागर जी ससंघ के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ।
10 वां राष्ट्रीय अधिवेशन व संगोष्ठि
आगरा के श्री 1008 नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मोतीलाल नेहरू रोड में अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ के तत्त्वावधान में राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी एवं अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ का 10 वां राष्ट्रीय अधिवेशन हर्षौल्लास के वातावरण आयोजित किया गया। आचार्य चैत्य सागर जी महाराज ससंघ के सान्निध्य में यह कार्यक्रम विशाल रूप में संपन्न हुआ।
राष्ट्रीय सम्मेलन
प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन
अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ का प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थ श्री महावीर जी में 1 मार्च 2007 को वहां विराजमान आचार्य श्री चैत्यसागर जी के मंगल आशीर्वाद से समन्वय वाणी जिनागम शोध संस्थान के आमंत्रण पर उपाध्याय श्री उर्जयंत सागर जी के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में 31 पत्रकार व संपादक सम्मिलित हुए।
द्वितीय राष्ट्रीय सम्मेलन
संगठन का द्वितीय राष्ट्रीय सम्मेलन उ. प्र. की धर्मनगरी मथुरा के दिगम्बर जैन संघ भवन के सभागार में 13 नवम्बर 2007 को उपाध्याय श्री निर्णय सागर जी के पावन सान्निध्य में वरिष्ठ जैन मनीषी प्राचार्य श्री नरेन्द्र प्रकाश जी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जैन पत्रकारिता दशा और दिशा विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई।
तृतीय राष्ट्रीय सम्मेलन
24 अगस्त 2008 को म. प्र. की इन्दौर नगरी में उपाध्याय श्री ज्ञान सागर जी के पावन सान्निध्य में संगठन का तृतीय राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न हुआ। उपाध्याय श्री ने अपने उद्वोधन में कहा - पत्रकारों को आध्यात्मिक जागृति हेतु सकारात्मक सोच बनानी होगी।
चतुर्थ राष्ट्रीय सम्मेलन
संगठन का चतुर्थ राष्ट्रीय सम्मेलन 23 व 24 जनवरी 2010 को महानगर कोलकाता के जैन भवन में वरिष्ठ समाजसेवी श्री मदन लाल जी बज की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
पंचम राष्ट्रीय सम्मेलन
संगठन का पांचवा राष्ट्रीय सम्मेलन 12 फरवरी 2017 को पौराणिक नगरी हस्तिनापुर में श्री रविन्द्र मालव जी की अध्यक्षता में तथा डॉक्टर हुकमचंद जी भारिल्ल के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।
पत्रकार सम्मेलन 2025
भारतवर्षीय दि. जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी व अ. भा. जैन पत्र संपादक संघ के संयुक्त तत्त्वावधान में ऐतिहासिक नगरी चंदेरी में 2 व 3 अप्रैल 2025 को मुनि श्री महासागर जी के पावन सान्निध्य में पत्रकार सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया जिसमें 79 पत्रकारों की उपस्थिति रही।
विविध गतिविधियां व कार्यशालाएं
विद्वत संगोष्ठियों के आयोजन
प्रथम विद्वत् संगोष्ठी
जबलपुर (म. प्र.) में आचार्य श्री विमर्श सागर जी के सान्निध्य में 22-23 अक्टूबर 2017 को आयोजित। सम्यग्दर्शन के विभिन्न अंग विषय पर संगोष्ठी में 19 सदस्यों ने भाग लिया।
द्वितीय विद्वत् संगोष्ठी
4-5 अक्टूबर 2018 को म.प्र. के छिंदवाड़ा शहर में रयणोदय ग्रंथ पर विचार संगोष्ठी आयोजित की गई।
तृतीय व चतुर्थ विद्वत संगोष्ठी
गोवा (अक्टूबर 2018) और मुम्बई (अक्टूबर 2019) में त्रिविसीय संगोष्ठियों का सफल आयोजन मुनिश्री प्रमुख सागर जी के सान्निध्य में हुआ।
जैन पत्रकारिता पर विद्वत् संगोष्ठी
7 अप्रैल 2024 को समन्वय वाणी के 44 वर्ष पूर्ण होने पर श्री मिलापचंद जी डंडिया की अध्यक्षता में 'जैन पत्रकारिता' विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
राष्ट्रीय कार्यशालाएं
सम्मान एवं अन्य कार्यक्रम
- संपादक संघ के पत्रकारों का सम्मान: पुष्पगिरि, इटावा और सम्मेदशिखर जैसी जगहों पर विभिन्न अधिवेशनों के दौरान संगठन द्वारा कई पत्रकारों को 'पं.नाथूराम प्रेमी पत्रकारिता पुरस्कार', 'आ. श्री प्रमुखसागर पत्रकारिता पुरस्कार' आदि से सम्मानित किया गया।
- पं. रतनचंद भारिल्ल व अन्य पुरस्कार: पुण्य स्मृति में 2021, 2022 और 2023 में देश भर के कई श्रेष्ठ संपादकों और पत्रकारों का सम्मान किया गया। श्री तरुण जैन को 'विक्रम साराभाई सम्मान' प्रदान किया गया।
- भट्टारक मठों में पत्रकार वार्ता: अक्टूबर 2018 में 19 पत्रकारों के दल ने मूडबिद्री, कारकल, ज्वालामालिनी मठ की यात्रा की एवं तीनों मठ के भट्टारकों के उद्बोधन प्राप्त किये।
- कोविड काल के वेबीनार: जैन धर्म आज और कल, जैन पत्रकारिता आज के दौर में, पंच बडी समस्याओं पर अनलाइन वेबीनार का सफल आयोजन किया गया जिनमें भारी संख्या में लोगों ने जुड़कर अपनी बातें रखीं।
- राष्ट्रसंत आचार्य श्री विद्यानंद जी जन्मशताब्दी: मई 2023 में दिल्ली में, जून 2023 में आगरा में, दिसंबर 2024 में वैशाली में, और अप्रैल 2025 में दिल्ली में जन्म शताब्दी पर विशाल संगोष्ठियों का आयोजन किया गया जिसमें देश के श्रेष्ठ विद्वानों ने अपनी भावांजलि दी।